मुश्किल  था हमदम इस दर्द को छिपाना

दिल में दबा के रखना ये प्यार का फसाना


लब थे  मेरे ख़ामोशनज़रे मचल गई थी

दो बूंद आसुओं की आंखों से गिर गई थी

~kavita nidhi

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