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Gullu ki shadi

  Gullu   मेरे एहसास को तुम गीत में अलफ़ाज़ दे देना  मैं जाऊं दूर तो तुम रोक कर आवाज़ दे देना इन्ही मुश्किल से रास्तो पे जो खो जाऊं मैं एक दिन तो  पता तुम याद रखना मंजिलो का साथ दे देना  कटे दिन धूप में चाहे बड़ी मुश्किल से मेरा पर  मैं जिसमे चैन से सोऊँ बस ऐसी रात दे देना  मेरा दिल प्यास से तड़पा बहुत है अब तलक सागर  मैं जिसमे डूब के नाचू  वो तुम बरसात दे देना  Mai lad bhi jaoongi Tere liye ab is jamane se  मेरे हाथो में बस तुम आज अपना हाथ दे देना  Mujhe yu to mili hai har taraf tareef logo se मगर ख्वाइश है थोड़े प्यार की तुम प्यार दे देना  बहारे तो बहुत सी आके गुजरी हैं ये  गुलशन से  गुजरना तुम मगर यूँ ज़िन्दगी गुलज़ार कर देना  बड़ी बेचैन सी आँखे है ...

जमघटों को देख लो

  जमघटों को देख लो   हैं सुलगती दिल में इनके नफरतों को देख लो  जल के हो गयी धुआँ इन सिगरटों को देख लो  हैं भरोसे को मेरे ये जोक सा सब चूसते  रंग बदलते हर घड़ी इन गिरगिटों को देख लो  हर ख़ुशी क्या जीत लोगे ज़िन्दगी में दौड़ के  उन अमीर बिस्तरों की करवटों को देख लो  है गुमान गर तुम्हे कि हो यहाँ तुम चिर यथा  एक बार जाके तुम उन मरघटों को देख लो   महफ़िलों की जान खुद को जो समझते हो यहाँ   खिलखिलाते थे जो, सूने पनघटों को देख लो चेहरे की उन रौनको पे मर  मिटें जो मेहरबान  आज उनही सूरतों की सिलवटों को देख लो  बंधनो में बंध के क्या तुम जीवन सुलझाओगे  गृहस्थ ज़िन्दगी के अब इन झंझटों को देख लो  पूछते हो क्या कमाया ज़िन्दगी में हैं निधि  तो जनाज़े पे मेरे, इन जमघटों को देख लो ~kavitaNidhi

Kavita- मैं राम लिखूंगी

  Kavita- मैं राम लिखूंगी कहते मुझको सीता सा वो अपना नाम मैं राम लिखूंगी  त्याग नहीं है सीता सा पर कर्त्तव्य का मान रखूंगी  कहते मुझको पार्वती सा शिव शंकर मैं नाम लिखूंगी   सबको अमृत देकर ये  विष का मैं तो पान करूंगी कहते मुझको राधा सा वो  मैं किशना अपना नाम लिखूंगी  राधा सी न प्रेम दीवानी  चंचल सी मैं श्याम बनूंगी  कहते मुझको सौम्य सुंदरी मैं अपना नाम हनुमान लिखूंगी  अपने राम का नाम मैं जप के सबका बेड़ा पार करूंगी  जो सरस्वती की सौम्यता है  तो काली सा गुस्सा भी मुझमे  प्रतिशोध है द्रौपदी सा ​​ और दुर्गा सी शक्ति भी मुझमें  मैं ऐसा कोई काम करूंगी की सार्थक अपना नाम करूंगी  दुनिया उसको याद रखेगी  मैं जो भी अपना नाम लिखूंगी

Gazal- दफ्तर से लौटा हूं

  Gazal- दफ्तर से लौटा हूं   ये रिश्ता जो बादल का है इस जमी से ये माना मेरा भी है वैसा तुम्हीं से है आवारगी को मेरी थाम लेती  बिखर के मैं बून्दो सा महकूँ तुम्ही से हुई पूरी छुट्टी वो मायके से आई  के दफ्तर से लौटा हूं घर मैं खुशी से कि बच्चों के आने से रौनक है घर में है जन्नत  मेरा  घर इन्ही की  हंसी से जो तुम आ गयी हो तो रोशन जहां है  कि लगता ये घर, तो घर बस तुम्हीं से वो सीटी की आवाज़,चाये की खुशबू कि हर चीज में है मजा बस तुम्हीं से निधी साथ हर पल ये उसका मैं चाहूँ  है ख्वाहिश नहीं और कुछ जिंदगी से ~kavitaNidhi 122 122 122 122 निगाहें  मिलाने 

Gazal- रुका वक़्त

Gazal- रुका वक़्त वहीं पे वक़्त रुका, वो ही समा है अब तक तेरे जाने का वो पल, ऐसे थमा है अब तक  नहीं मैं रोया हूं उस दिन से कभी तेरे लिए मेरी आँखो मे वो मंज़र यू जमा है अब तक  बुझी सी जिंदगी सायो में भटकता हूँ मैं तेरी यादों से ही महफ़िल में शमा है अब तक चलूँ मैं कैसे बता, दुनिया, जमाने के संग मेरा मन तुझमें ही ऐसा जो रमा है अब तक नहीं है भूले मुझको याद वो करते हैं    निधि  इसी एक बात का तो खुद पे गुमा है अब तक  ~kavitaNidhi हमें तो लूट लिया मिल के हुस्नवालों ने 12221 1222

Gazal- खिलता है घर बेटियों से

Gazal- खिलता है घर बेटियों से सबक ये मिला है मुझे आशिकी से के होती मुहब्बत नहीं हर किसी से  जो पाया तुम्हें हर खुशी मिल गई है  नहीं है गिला अब मुझे जिंदगी से नहीं मुझको जाना यहां पर किसी ने  कि पहचान यूं तो मेरी है सभी से  कि कहने को तो कह रहा वो हंसी में ये कड़वाहतें पर,छुपी ना किसी से  थी गैरत बड़ी ना झुका वो कहीं पे झुका आगे औलाद के सर ख़ुशी से  है जीवन की मेरे निधि बस इसी से कि खिलता है घर बेटियों की हंसी से ~kavitaNidhi  Nigahen milane ko jee chahata hai  122 122 122 122

Gazal- इश्क़ का नशा

इश्क़ का जो नशा ये चढ़ता है  मुश्किलो से ये दिल संभलता है  धुंध छट जाए तो दिखाई दे  वर्ना हर शक्स तुझ सा लगता है  प्यार की इस तरह खुमारी है बे सबब दिल मेरा धड़कता है  क्यों मैं चाहत में हूँ तेरी पागल  प्यार पे जोर कहाँ चलता है  जिस तरह मुझसे वो मिला है निधि  दिल का दिल से कोई तो रिश्ता है ~kavitaNidhi 2122 1212 22