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जिद

हमसफ़र बानी शिकस्त साथ चलती रही मैं  वो सीखती रही जो ये सिखाती रही टूटी तो मैं थी कई बार मगर उम्मीद ही थी जो हौसला बढाती रही सूरज ने था जब बदलो का पर्दा किया मैं अँधेरे में दिए हिम्मत के जलती रही चाँद ने जब लूटी थी मेरे सितारों की चमक मैं  साहस के जुगनुओं से रातें जगमगाती रही हवाओं ने कभी जब बदला था रुख अपना मैं मेहनत का लंगर डाल नौका बढाती रही किस्मत की पतंग ने भी लड़ाये थे पेंच जब डोर मैं सब्र की हाथों में थामे ही रही तेज तूफानों ने जो थे वार कई बार किये मैंने टूटी हुई कश्ती में हाथ पतवार किये कभी जो पैर मेरे डगमगाए थे जरा मेरी नज़रे पर साहिल के उस पार रही जो भी लिखा था गीले से साहिल पे मैंने सागर की ये लहरे उसे मिटाती ही रही मैंने सीखा है इन लहरों से जिद करना मगर घरोंदे रेत के, ये गिरती, और मैं बनती ही रही

चिठ्ठी

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तेरी चिठ्ठी  जब भी आती थी एक खुशबू साथ लाती थी तेरी लिखी वो एक चिठ्ठी जाने कितना कुछ कह जाती थी लिखे शब्दों की बनावट  असमय विराम लगाना कुछ शब्द गहरा बनाना कुछ अधूरे छोड़ देना और वो बिन वजह की जगह सब बोलते थे , कुछ कहते थे. कुछ बिंदु तेरी कश्मकश बताते और गहरे अक्षर तेरा गुस्सा जताते और वो अकारण अनुच्छेद बदल कर वो तू जो भी छुपाती चिठ्ठी वो सब कह जाती शब्दों के बीच छोड़ी जगह तेरी ख़ामोशी सी लगती थी मैं उंगलियों से छूता था तो ये महसूस होती थी मेरे नाम का पहला अक्षर  तू जिस तरह बनाती थी  उसकी अलग लिखावट बताती थी  की तू मुझे कितना चाहती थी  तेरी चिठ्ठी जब भी आती थी  तेरी खुशबू साथ  लाती थी 

माँ तू यहाँ है

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मैं कब से सोई नहीं वैसे  कभी सोई थी तेरी गोद में जैसे  आलिशान बिस्तर है मखमली चादर  पैर तेरी साड़ी से आती खुशबू कहाँ है? कितने ही तालो में सुरक्षित हूँ मैं  तेरी गोद सा मेहफ़ूज़ एहसास कहाँ है? याद है मुझको तेरी उंगली पकड़ना  और वो मेरा बहकते कदमो से चलना  अब थक गयी हूँ चल चल कर मैं  वो आगे बढ़ने का निडर जज्बा कहाँ हैं?  तेरी उँगलियों ने दिखाए थे जो सितारे  वो और उन्हें पाने की चाहत कहाँ हैं? तेरा वो प्यार से खाना बनाना  और मुझे आपने हाथ से खिलाना  आज खाने को पकवान बहुत हैं  पर वो तेरे हाथ सी मिठास कहाँ हैं? कैसे भूलूंगी उन पलों को मैं  माँ मुझ पे तेरे ये एहसान बहुत हैं  मेरी हर धड़कन को छुआ है तूने  आज मैं तेरी रूह को  छू रही हूँ वही एहसास, वही ख्वाब दे रही हूँ  मेरी बेटी की पलकों में  उसकी गर्म हथेली की पकड़  हर पल कहती है मुझसे  " माँ तू यहाँ है " मुझमे "माँ तू यहाँ हैं"        ...

धरती की व्यथा

आज मानव कोरोना जैसी वैश्विक महामरी से त्रस्त है।  ये बीमारियां, प्रदुषण  और बहुत सी ऐसी ही परेशानियों का आज हमे सामना करना पद रहा है।  और ये मानव जाती की वर्षो से चली आ रही शोषण की नीति का परिणाम है।  मानव ने जिस तरह धरती को प्रदूषित किया है हुमाज उसी के परिणाम भोग रहें हैं।     अक्सर सोचती हूँ अगर आसमान नीचे उतर आये तो हम क्या उसे भी इसी तरह शोषित करेेंगे। ये कविता इसी पर आधारित है।   एक बार आसमान ने धरती से नीचे आने की इच्छा प्रकट की, तब धरती ने आसमान से अपनी पीड़ा इन शब्दों में बयां की - आसमान ने धरती को इच्छा अपनी बतलायी हैं  एक बार तुझ संग धरती  में नीचे रहने को आऊँगा  आँखों में आंसू थे उसके, ऐसे  तड़प उठी थी धरती  पीड़ा से करहा कर  बोली, तू  कैसे यहाँ रह पायेगा  गर तू नीचे आएगा, तू टुकड़ो में बट जायेगा कोई अमेरिका, कोई रूस और कोई चीन कहलायेगा खींची पड़ी इन सरहद में, तू सांस नही ले पायेगा और भड़कती नफ़रत से फिर दम तेरा घुट जायेगा रौशनी तेरी, छोटे छोटे टुकड़ो में बाँटी जाएगी और कीमत उसकी ...

प्यारी सी नाती

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आज मेरे होठो पे फिर से,एक पुरानी धुन आयी है नैनो में जो चेहरा है ये, लगता तेरी परछाई है यादें फिर से ताज़ा हो गयी, जिन पे धुल ये घिर आयी है आज मेरी बेटी के घर में, नन्ही सी बेटी आयी है पच्चीस बरस गयी है पीछे, उम्र  वो पल यूँ जी आयी है जिस पल ये प्यारी सी नाती, गोद में आके मुस्काई है वही अदा है वही हंसी है, वही आँख में सच्चाई है जैसी तुम प्यारी थी बिटिया, बिटिया तुमने भी पायी है ऐसी ही किलकारी होगी, खिल खिल कर वो हंसा करेगी छोटे छोटे हाथ बढ़ा कर, पापा पापा कहा करेगी और जरा फिर बड़ी हुई तो ठुमक ठुमक कर चला करेगी पेरो में प्यार ये बंधे छम छम छम छम किया करेगी कुछ बुद्धू सी कुछ समझी सी, कितनी बाटे किया करेगी फिर वो अपने पापा के संग, कुछ नखरे भी किया करेगी मम्मी की आवाज़ को सुन के,  परदों  में ये छुपा करेगी और अचानक आगे आकर, फिर गोदी में चढ़ा करेगी आज वही आँखों के आगे घड़ियाँ फिर से जी आयीं है जिस पल मैंने देखा था की गुड़िया मेरी शर्मायी है सखियों संग थी बातें हर पल, मासूम सी अंगड़ाई है कलियों सी जो...

Depression

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Dark in the night Having some horrifying sight Crying slowly in fright  Nothing seems to be right  Don’t wanna see light It hurts, it’s too bright No one does understand  They just say, it will be alright Mornings don’t look great It makes me agitate  I don’t love anything Infact to myself, I do hate  I just drag the day Waiting for another night  No one does understand  They just say, it will be all right  For no reason I just cry  I don’t feel happy at all No matter how much I try My body feels burdened My soul is ready to fly Just like a big dragon kite But No one does understand  They just say, it will be all right  Some time it feels so hard To live, It’s better to end my life Screening, beating, I just go mad Searching around a knife Afraid next moment, to me I am giving a tight fig...

ताजमहल-Poem on domestic violence

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चीखती, करहाती, बिलखती एक आवाज़  दफ़न हो गयी ताजमहल में मुमताज़  उसके सपनो का वो ताज महल  जो बनवाया था उसके शहजहां ने  जो सपना उसने देखा था बरसो  और सजाया था जिसे बड़े प्यार से  फूली न समाती थी वो  जब आकार ले रहा था ये सपना  पति, पति का घर और घरवाले  लगता था सब आपना  फिर समझी काफूरी दिखती  इसकी दीवारे और छत संगेमरमर के थे  और इस इमारत में इज़्ज़त नाम के  नाजुक पर बेहद मजबूत दरवाजे लगे थे  वो दरवाजे तोड़ निकल जाना चाहती  पर रिश्तो की बेड़िया उसे  रोक लेती  और वो सर पीट कर इन हसीं दीवारों से  सुबकती हुई ही रह जाती  लोग आते उसके प्यार का ताजमहल देखते  और हँसते मुस्कुराते तारीफ करते  और उसका दिल दर्द से तड़प उठता  और जिस्म के ज़ख्म करहा उठते  बो किसी तरहा अपने आंसू रोकती  फिर खुद को इस बेहद ख़ूबसूरत  ताजमहल रुपी रिश्ते में ...

चांदनी

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चांदनी तारो की चूनर ले बादलों की डोली में हवाओ के रस्ते खिड़की से मेरे कमरे में उतर आयी मेरे बिस्तर की सलवटों पे थिरक रही थी, मचल रही थी उसकी शीतलता मेरी उंगलिया छुकर मेरी सांसों की डोर से मन में उतर आयी ये जो कुछ सरसरी सी हुई है इसके छूते ही तन में एक पुराना एहसास ले आयी तेरे साथ गुजारी उस रात की महकी सी एक याद ले आयी याद तेरी आते ही जाने क्यों हँसी सी है आयी होंठ मुस्कुराएं मेरे पर आँख नम सी हो आयी ये जो चांदनी है ना लगता है ये भी संग मुस्काई इन कीमती पलों में शायद मेरा साथ देने चली आयी

बात हमारी बन जाएगी

माना तुझको है प्यार नहीं लगता हूँ अच्छा, इंकार नहीं पर मेरे प्यार की बातों से ही बात हमारी बन जाएगी इन सर्दी की रातों में जब ठंडी तुझको तड़पायेगी मेरे प्यार की चादर लम्बी तेरी मेरी कट जाएगी माना नहीं  है सपने मेरे फिर भी इस आगोश में मेरे रातों में तू उठ कर रोए ऐसी रात नहीं आएगी मेरे प्यार को न चाह कर फिर कितने दिन तू रह पाएंगी एक ना एक दिन तेरी आँखे प्यार है मुझको कह जाएँगी 

चुस्कियां कुछ भरते हैं

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कडक़ती सी दुनिया है, सर्द पड़ी ज़िन्दगी आओ संग चाय की, चुस्कियां कुछ भरते हैं एक सिलाई तुम बनो, दूसरी मैं बन जाऊं चलो ऊनी से ख्वाबों के, स्वेटर हम बुनते हैं कभी तुम मुझको सुलझाओ, कभी मैं तुमको उलझाऊँ चलो रंगीन गाँठो के रिश्तें में बँधते हैं धागों को दिल के, उँगलियों से छूकर नर्म शालो में, गर्म से ज़ज़बात बुनते हैं मीठे एहसासो को, शक्कर सा घोल कर आओ संग चाय की, चुस्कियां कुछ भरते हैं

उसी झील पे

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आज गयी थी उसी झील पे , हम  तुम पहली बार मिले थे तेरे प्रथम प्रणय निवेदन से , सपनो के संसार सजे थे आसमान खुशियों से रोया, और ज़मीं कुछ पिंघळी सी थी लहरों सी उठती गिरती वो एक घटा कुछ उमड़ीं सी थी और कनेरी घूप बिछि थी सेज हमारी बनने को चिड़ियों की बोली लगती थी शहनाई सी बजने को आज वहां पर वीरानी थी तन्हाई सी छायी थी बरखा जैसे चली गयी थी ऋतू पतझड़ की आयीं थी गिरते थे मुरझा मुरझा कर  अपनी उन यादो  के पत्ते कैसे उड़ने देती उनको प्यार भरे वो खत तेरे थे सूखे थे बिलकुल अंदर तक आग पकड़ली जल्दी से जल के अब बुझ ही जायेंगे टुकड़े ये मेरे दिल के राख बनीं उन यादों को भी हवा ले गयी संग अपने और बचे अवशेष भी अब तो मिल जायेंगे  मिट्टी में आओगे जब भी तुम ऐसे इस झील के कोने पे मुठ्ठी में लेना तुम मिट्टी और गिरना पानी में सपने मेरे दिख जायेंगे तुम्हे झील आईने में और दफ़न हो जायेंगे वो इसी झील के पानी में

बंधन ने घेरा है

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बंधन ने घेरा है ख्वाबो पे पहरा है  घुप से सन्नाटे है  छाया घनेरा हैं   स्याह अँधेरे में  छुपता सवेरा है  घोड़े सी सोचों का ये मन तबेला था  खींचती लगामों से अब क्यों ये ठहरा है आजाद पंछी ये  एकदम अकेला है  बिखरे परो को ले  कोटर में बैठा है  शतरंजी चालों को कैसे ये खेला है आपने ही मोहरों ने रानी को घेरा है  आँखों ने वकृत सा  व्यक्तित्व देखा है  दर्पण में दीखता  क्या मेरा ही चेहरा है ? रेशम के धागों से एक घर बनाया है आपने ही जले ने मकड़ी को घेरा है  बंधन ने घेरा है  ख्वाबो पे पहरा है 

कुछ और ख्वाब सजाते हैं

उन ऊँचे कूचो  में रहने वालो सुनो ये दबी आवाज़ें वक़्त रहते सुनलो इन्हे खोल आपने कानों के दरवाजे जो क्रोध नहीं सुने जाते हैं वो आक्रोश में  बदल जाते हैं रेतीले तूफ़ान वही आते हैं जहाँ पर मैदान रोंदे जातें है जो हवाएं बहने नहीं दी जाती हैं वो ही बवंडर सी उभर आती है देखो ये चिंगारी सुलगने न पाए एक झोके से ये आग में बदलने न पाए  चलो सुनते है हालत उस मछली की जिसके सर तोहमत है तालाब गन्दा करने की क्यों न हम मिलके इसका उपचार करें तोहमत लगाने से नहीं कुछ हासिल इस पर  भी आओ कुछ विचार करें काट कर फेकना इतना भी आसान नहीं जब सड़ने वाला हाथ हो अपना नोच कर फेक दें कुछ फूल ये मुनासिब नहीं  जब हो ये गुलिस्ता अपना उन ऊँचे कूचो में  रहनें वालो चलो कुछ और फूल लगते हैं वो जो मुरझाये से दीखते है हमें उनकी आँखों में कुछ और ख्वाब सजाते हैं कुछ और ख्वाब सजाते हैं.

मैं जो हूँ...

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मैं जो हूँ... मै क्यों  कुछ और बनूँ मैं जो हूँ मैं वही रहूंगी तुमसे बराबरी नहीं चाहिए मैं मेरी मंजिल खुद चुनूंगी मैं जो हूँ मैं वही रहूंगी तुम कौन हो मुझे मेरे ही अधिकार देने वाले  मै अपने अधिकार खुद चुनूँगी  मैं जो हूँ मैं वही रहूंगी  लड़की हो इस वक़्त बहार मत जाओ  लड़की हो ऐसे कपडे मत पहनो  तुम्हारी सोच के दायरे में मै नहीं बंधूंगी  मैं जो हूँ मैं वही रहूंगी  क्यों यहाँ सिर्फ सीता ही साथ निभाती है पत्नी के साथ वनवास जाना क्यों दुनिया राम को नहीं सिखाती है  हर बार अकेले वनवास मैं ही क्यों सहूंगी अपनी पवित्रता हर बार यहाँ  मैं ही  साबित नहीं करूंगी मैं जो हूँ मैं वही रहूंगी हर बार क्यों राधा ही प्रीत निभाती है श्याम कर्त्तव्य के लिए राधा को छोड़ जाएँ या फिर राधा के रहते गोपियों संग रास रचाये दुनिया उन पर  ऊँगली नहीं उठाती है मैं  क्यों न इस बार श्याम बनूं क्यों मैं ही हर बार राधा बनूंगी  मैं जो हूँ मैं वही रहूंगी  घर के बहार तख्ती तेरे नाम की  और मैं घर ल...

कल आज और कल

मेरा आज ये कहता है मेरा आज ये कहता है एक रात का फेरा ले मुझे कल फिर आना है कल बन कर आज तेरा फिर कल हो जाना है किस्सा दो रातों का जीता ये ज़माना है न कल वो मेरा था न कल ये मेरा है कल आज ही जीना है बस आज ही मेरा है इन दो रातों के बीच मेरा आज अकेला है इस आज से पहले भी अनजान अँधेरा है इस आज के जाते ही अनजान अँधेरा है ये वक़्त नहीं रूकता इसको तो जाना है मेरा आज पराया हो मुझे इसको जीना है यादों के धागों में हर पल को पिरोना है मुझे आज में  जीना है मुझे आज में  जीना है 

गवाही...

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समेटे दर्द अंचल में, नमी ये मेरी आँखों की गवाही दे रही सबको मेरे बर्बाद होने की ये टूटे दिल के टुकड़े अब कहाँ ले कर मैं जाऊंगी यहाँ हर नज़र मुझ पर है इन्हे कैसे छुपाऊँगी तुम्हे दिल तोड़ने का हक़, भी तो मैंने दिया था दिल जीतने की ख़्वाहिशें किस को जताऊँगी तेरे बंधन में बंध कर भी ये दिल आज़ाद सा था तेरी यादोँ के बंधन को मैं कैसे तोड़ पाऊंगी मेरी हर बात में  हरदम तेरा ही ज़िक्र आता था बिना तेरे न जाने अब मैं क्या किसको बताऊंगी उड़ा ये रंग गलों का, खफा ये  बात होठोँ की गवाही दे रही सबको मेरे बर्बाद होने की

ग़ज़ल की पंक्ति हूँ

ग़ज़ल की पंक्ति हूँ दर्द में लिपटी हूँ बिखरी बिखरी सी हूँ टुकड़ो से जो निकली हूँ कुछ अधूरी सी हूँ और तन्हाई में सिमटी हूँ बुझी बुझी  सी हूँ दिल जला के निकली हूँ तेरे दिल तक पहुँचूँ तो मैं एक शेर बन जाऊं तू जो पढ़ ले मुझे एक बार तो संगीत हो जाऊं अफसाना कहूँ मैं तेरी प्रेम कहानी का तेरे होठों को छू लूँ  तो अमर मैं गीत बन जाऊं ग़ज़ल की पंक्ति हूँ दर्द से लिपटी हूँ  बिखरी बिखरी सी हूँ टुकड़ो से जो निकली हूँ 

हिसाब किताब ज़िन्दगी के.....

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खाव्हिशो के लिफाफे में,  हौसलों के चंद नोट लेकर निकले थे इस कदर महंगी थी ज़िन्दगी, सब खर्च हो गए,  दो वक़्त की रोटी और एक छत जुटाने में  हम काम करते रहे जाने कितने सूरज निकलते और ढलते रहे कुछ कमाने के चक्कर में खर्चे  बेहिसाब करते रहे पर वो हम थे जो हिसाब में कच्चे थे ज़िन्दगी के तो हर हिसाब किताब पक्के थे गिन के दिए थे हमे  और गिन के ले भी लिए   ये हम ही थे जो न समझे  कि मरने से पहले  आखिर कितने दिन जिए  ज़िन्दगी के तो  हर हिसाब किताब पक्के थे  पर वो हम ही थे जो  हिसाब में कच्चे थे 

बहता वक़्त

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वक़्त का पानी बरस रहा है  पल पल लम्हा टपक रहा है  कैसे भरलूँ मैं अपनी हथेली  कि कुछ बूंदे हो जाये मेरी  दो रातों की मेड़ बनाऊं  और आज को वही रूकाऊँ  पर  कब ये पानी थमता है  हर आज कल में  ढलता है    लम्हा लम्हा जब गिरता है  बरसो का झरना झरता है  एक उम्र बाह जाती उसमें  यादों का दरिया बनता है  वक़्त का पानी बरस रहा है  आज ये कल में बदल रहा है   

जीवन का गाड़ित। ..

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जीवन का गाडित ये कैसा है जीवन का गणित ये कैसा है जोड़ घटा की दौड़ मे   कुछ गुना बना लूँ हर तरफ यही तो भाग है हर तरफ यही तो भाग है भाग से क्या क्या भाग हो गया क्या इसका तुमको अंदाज है? ये क्या अंको का खेल है तुमको बतला दूँ जीवन का गणित ये कैसा है तुमको समझा दूँ दिल जोड़ो खुशियां गुना बढ़ा लो घटा दूरियां प्यार बढ़ा लो जब दिल जुड़ते है गम घटते है जब साथ हो सबका हम बढ़ते है भाग भी उसको गुना करेगा मेहनत से जब हम बढ़ते है जीवन का गणित कुछ ऐसा है तुमको समझा दूँ जीवन का गणित कुछ ऐसा है तुमको समझा दूँ