छीन वो सकते नहीं

               छीन वो सकते नहीं


रोक वो सकते हैं राहें , मोड पर सकते नहीं

मंज़िलों को मुझसे मेरी छीन वो सकते नहीं


हाथ कट सकते हैं पर, तकदीर छिन सकती नहीं

है लकीरें जीत की तो,  हार हम सकते नहीं 


चाहे मेरे खून का वो क़तरा क़तरा  सोख दें

इन रगो में दौड़ता, जज्बा मिटा सकते नहीं



याद रखना,भूल जाना, चुनना उनका हक तो है

मेरी यादों में रहेंगे, हक ये ले सकते नहीं


वो मुझे चाहे ना चाहे, हैं ये उनके हाथ  में

मेरे दिल से प्यार को पर , वो मिटा सकते नहीं



मेरे हिस्से की जमीं वो चाहे तो सब छीन लें 

रोशनी और इस हवा को बाँट वो सकते नहीं


~ Kavita Nidhi






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