Cigarette
क्यो मुझे इतना उलझा रहे हो
Cigarette सा मुझे क्यो सुलगा रहे हो
दिल में जो है कह भी दो
प्यार का एक कश ले भी लो
फिर धुआं बन कर हवा में बिखर जाऊं
होठो से लगा लो तो सांसो में उतर जाऊं
सांसों की ये गरमी अब दे भी दो
प्यार का अब एक कश ले भी लो
तेरी उँगलियों के बीच ही रह जाए मेरा वजूद
तेरी इन आंखों के नशे में मैं रहूं मौजूद
अपनी बाँहों के ये साये मुझे अब दे भी दो
सुनो प्यार का अब एक कश ले भी लो
खतम होना ही है मुक्कादर मेरा, मैं क्या करूं
बिन तेरे भी जालना है तो क्यो ना तेरे साथ जलूं
मुझे तुम खुद में खो जाने भी दो
सुनो न प्यार का और एक कश ले ही लो
तेरे दिल की एस्ट्रे में राख बन के मैं रहूं
एक खुमार बन के मैं तेरी रगों में बहू
तुम भी हो मेरे अब ये कह भी दो
प्यार का एक कश अब ले भी लो
~ Kavita Nidhi
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