Muktak
न उसने इजाज़त मांगी, न हमने अलविदा कहा
उसे दूर जाना था और बस हमने जाने दिया
न रिश्ता तोडा और न आवाज़ ही दी
बस उसे वक़्त की गर्त में खोने दिया
कुछ रिश्ते न टूटते हैं न आवाज़ करते हैं
बस वक़्त के गर्त में ख़ामोशी से खो जाते हैं
कोई समझाए मुझे ये फ़लसफ़ा आ कर
कभी थे जो आशना, क्यों अजनबी से हो जाते हैं
~kavita Nidhi
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