Posts

Showing posts from January, 2022

Today

Ek baar Phir se Aap sabhi ko Nirala ji ke janam din ki hardik badhayi  Aur Basant panchi ki Shubhakamnaye  Basant ki baat Ho to prem per kuch keh a banta hai.  Navchetan ki taraf se is amanataran ke liye dhanyawaad  Namaste alka ji, Neelam ji, Aur naresh ji, Aur Shaifali ji  महफ़िल में यारों की जब जब, चर्चा अपना जो आएगा  जब नाम सुनेगे मेरा सब, तुझको भी पूछा जायेगा  भूली बिसरी उन यादों का, किस्सा दोहराया जाएगा  टूटा टूटा दिल मेरा तब, टुकड़े टुकड़े हो जायेगा  ————-/— प्यार के बोल का प्यार ही मोल है प्यार को तोल न प्यार अनमोल है प्यार निशब्द है, प्यार ही गूंज है प्यार की है जो भाषा वही मौन है ———/////// आज गयी थी उसी झील पे , हम  तुम पहली बार मिले थे तेरे प्रथम प्रणय निवेदन से , सपनो के संसार सजे थे आसमान खुशियों से रोया, और ज़मीं कुछ पिंघळी सी थी लहरों सी उठती गिरती वो एक घटा कुछ उमड़ीं सी थी और कनेरी घूप बिछि थी सेज हमारी बनने को चिड़ियों की बोली लगती थी शहनाई सी बजने को आज वहां पर वीरानी थी तन्हाई सी छायी थी बरखा जैसे चल...
महफ़िल में यारों की जब जब, चर्चा अपना जो आएगा  जब नाम सुनेगे मेरा सब, तुझको भी पूछा जायेगा  भूली बिसरी उन यादों का, किस्सा दोहराया जाएगा  टूटा टूटा दिल मेरा तब, टुकड़े टुकड़े हो जायेगा  तुम दूर वहां पर  कैसी हो, मै कॉल तुम्हे  कर के पूछूं  उस पल तुझसे मिलने को, दिल मेरा भी कर आएगा  तुझको बदनाम न होने दूंगा, ये एतबार तू रख लेना  दिल रोयेगा पर होठो पे, कभी नाम तेरा न आएगा  ख्याल तुझे मिलने का उस पल ,दिल में मेरे पर आएगा 

छीन वो सकते नहीं

               छीन वो सकते नहीं रोक   वो   सकते   हैं राहें  ,  मोड   पर   सकते   नहीं मंज़िलों को   मुझसे   मेरी   छीन   वो   सकते   नहीं हाथ   कट   सकते   हैं   पर ,  तकदीर  छिन   सकती   नहीं है   लकीरें   जीत   की   तो ,    हार हम सकते नहीं  चाहे   मेरे   खून   का   वो   क़तरा   क़तरा     सोख   दें इन रगो में दौड़ता, जज्बा मिटा   सकते   नहीं याद   रखना, भूल   जाना,  चुनना   उनका   हक   तो   है मेरी   यादों   में   रहेंगे ,  हक   ये   ले   सकते   नहीं वो   मुझे   चाहे   ना   चाहे ,  हैं   ये   उनके   हाथ    में मेरे   दिल   से   प्यार   को   पर  ,  वो   मिटा   सकते   नहीं मेरे...

Muktak collection

  mehfil me yaaron ki jab jab charcha ye aapna aayega   Jab naam sunege mera sab tujhko bhi poocha jayega  Jo naam tera yu aayega Aur kissa dohraya jayega Ye TutA tuta dil mera phir tukde tukde ho jayega  Mere zajbaat itne kyo Naye se aaj lagte hai Ye soye the kahi pehle Jage se aaj lagte hai Mai jo Mahsoos karti hoon Ye mujhmai the kahin pehle Ya ye dil ke dhadakane se Achanak dil mai aaye hai मेरे जज्बात इतने क्यो नए से आज लगते हैं ये सोये थे कहीं पहले जगे से आज लगते हैं तुम्हारा पास आना भी मेरी धड़कन बढ़ाता है इसी के शोर से शायद ये मुझमें ख्वाब जगते हैं न मुझको दोष देना तुम या मुझे रोक देना तुम निकलते से मेरे हाथो से  ये हालात लगते हैं मेरे हालात मेरे हाथ से जो इस पल निकलते हैं ——/ मेरे   जज्बात   छू   कर   यूं वो   देखो   मुस्कुरायें   हैं  खुली   आंखों   में   ये   रंगीन   कितने   ख्वाब  आएं  है सजते  मैं   जो   महसूस   करती  हूं ये   मुझमे  ...

Cigarette

क्यो   मुझे   इतना   उलझा  रहे   हो Cigarette  सा   मुझे   क्यो   सुलगा   रहे   हो दिल   में   जो   है   कह   भी   दो  प्यार का   एक   कश   ले   भी   लो फिर  धुआं  बन   कर   हवा   में   बिखर   जाऊं   होठो से   लगा   लो   तो   सांसो   में   उतर   जाऊं सांसों की   ये   गरमी   अब   दे   भी   दो   प्यार का  अब   एक कश    ले   भी   लो तेरी उँगलियों   के   बीच   ही   रह   जाए   मेरा   वजूद तेरी   इन   आंखों   के   नशे   में   मैं   रहूं   मौजूद अपनी बाँहों के ये   साये मुझे अब   दे   भी   दो  सुनो  प्यार का  अब   एक कश    ले   भी   लो खतम   होना   ही   है   मुक्कादर   मेरा ,...
मुश्किल   न   था   हमदम   इस   दर्द   को   छिपाना दिल   में   दबा   के   रखना   ये   प्यार   का   फसाना लब थे    मेरे   ख़ामोश ,  नज़रे   मचल   गई   थी दो   बूंद   आसुओं   की   आंखों   से   गिर   गई   थी ~kavita nidhi

अशोक

हर   तरफ   नर  मुंड   थे   हर   तरफ   चितकार   थी खून   से   लठपथ   था   सब इंसानियत   बेज़ार   थी यत्र   तत्र   बिखरे   थे   अंग देह   पड़ी   बेहाल   थी डूबते   सूर्य   सी   देखो ये   धारा   भी   लाल   थी धूल   भी   उड़ती   थी   लाल   गंध   रक्त  की  लिए थे बुझे रण   भूमि   में जलते   हुए   कितने   दिए जीत   की   खबर  घरो में  लाश   संग   थी     आ   रही मौत   का   ये   जश्न   था और   जिंदगी   घबरा   रही देख   कर   ये   दृश्य   सारा   हार   भूला   जीत   भूला   सोच   में   बैठा   हुआ   था पाया   क्या   और   क्या   हैं   खोया आँख   में   अश्रु   भरे   थे संताप   से   मन   था  ...
 वो बागों का शहर, कुछ यादो का शहर  बैंगलोर जवान नेक इरादो का शहर बैंगलोर वो गुलाबी से मौसम.. हल्की बौछारों का शहर बंगलौर। खूबसूरत गुजरे ज़माने  का शहर बैंगलोर।

Muktak

 न उसने इजाज़त मांगी, न हमने अलविदा कहा  उसे दूर जाना था  और बस हमने जाने दिया  न रिश्ता तोडा और न आवाज़ ही  दी  बस उसे वक़्त की गर्त में खोने दिया  कुछ रिश्ते न टूटते हैं न आवाज़ करते हैं  बस वक़्त के गर्त में ख़ामोशी से खो जाते हैं  कोई समझाए मुझे ये फ़लसफ़ा आ कर  कभी थे जो आशना, क्यों अजनबी से हो जाते हैं  ~kavita Nidhi