मन मेरा बेचैन है, या ऋतुओ का फेर है। ठण्डी सी हवाए क्यों लगती है वज्र सी, लेती इम्तेहान मेरा हर घड़ी सब्र की। हर लम्हा रुक गया है, बैठा है पास मे, आयेंगे पिया मेरे, है ऐसी ही आस मे। इतना समझाया इसे, आभी कुछ तो देर है , मन मेरा बेचैन है, या ऋतुओं का फेर है। बारिश की बूंदे यूँ, मन को छू रही है क्यों, बैठी हूँ दूर फिर भी तन भिगो रही है क्यों। पत्तों की सरसराहट हर तरफ है गूंजती, कदमो की हर आहात, कानो से पूंछती। दृश्य मैं हो तुम ही तुम, ये आँखों का हेर है, मन मेरा बेचैन है या ऋतुओं का फेर है। आभी तक महसूसती हूँ उंगलियों की छाप जो, पिंघल के कुछ उड़ गया है, तन मेरा है भाप जो। कमरे के कोने में चादर को ओढ़ के , बैठी समेट के और पैरों को मोड़ के। सन्नाटा छाया है, ख्वाबों का घेर है , मन मेरा बेचैन है या ऋतुओं का फेर है।
चाय सिर्फ चाय नहीं, एक बहाना है यारो के साथ बैठे दिल की बात सांझा करने का भागती जिंदगी मैं थोड़ा रुक सकून की सांस लेने का कुछ घड़ी ख्वाइशों और ख्वाबो में खो जाने का गिरती बारिश में दूर से ही बैठे बैठे भीगने का बीती बिछड़ी यादों में थोड़ा और गहरा डूबने का हर चुस्की के साथ जिंदगी और ज़्यादा महसूसने का दोस्तों, ये सिर्फ चाय नहीं एक बहाना है फिर चलने से पहले, कुछ ठहरने और संभलने का बाहर का शोर छोड़, अपने भीतर झाँकने का तुमसे दिल ही दिल में दो चार बातें करने का बहाना है,खूबसूरत जिंदगी को खामोशी से सराहने का चाय के धुए से कुछ खुशबू और गर्मी चुराने का और कितने अनमोल हैं ये पल, खुद को बताने का चाय सिर्फ चाय नहीं, एक बहाना है ये कहने का कि ज़िन्दगी ठहर जरा, मुझे कुछ और जीने दे कुछ और अपनी मीठी गर्म चुस्किया लेने दे हाथो से फिसलने से पहले मेरी सांसे छूने दे चल पडूंगा उस रास्तें पे जहाँ तू ले चलेगी बस एक पल को इसी मोड़ पे खड़ा रहने दे जो जैसा है उसे कुछ और देर वहीँ थमा रहने दे ...
2122 1212 22 एक जैसा कहां ये चलता है हर घड़ी वक़्त ये बदलता है आज तेरा है कल मेरा होगा सिलसिला जीत का यू चलता है आंसुओं के शरारे गिरते हैं हो धुआं दिल मेरा जो जलता है राहें-मंज़िल दिखे है धुंधली सी अश्क़ बन ख्वाब जो पिंघलता है सच को सच जब भी बोलती हूँ निधि मेरा लहज़ा सभी को खलता है ~kavitaNidhi धुँधला सा सब यहाँ नज़ारा है दिख रहा हर नज़ारा धुंधला सा ज़िन्दगी ऐसी एक खुमारी है इश्क़ का यूँ खुमार चढ़ता है मुश्किलो से नशा उतरता है -/————- इश्क़ का जो नशा ये चढ़ता है मुश्किलो से ये दिल संभलता है धुंध छट जाए तो दिखाई दे वर्ना हर शक्स तुझ सा लगता है प्यार की इस तरह खुमारी है बे सबब दिल मेरा धड़कता है क्यों मैं चाहत में हूँ तेरी पागल प्यार पे जोर कहाँ चलता है जिस तरह मुझसे वो मिला है निधि दिल का दिल से कोई तो रिश्ता है ~kavitaNidhi ——— टूट के दिल मेरा जो बिखरा है आसमा आतिशी सा दिखता है सोचने जो लगा वो ...
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