जूनून
आँखों में दहकते शोले , मेरे दिल में है बेचैनी
एक ख्वाब खुली आँखों से मैंने तो अभी देखा है
तितली सी फड़क उठती है मेरी धड़कनो में अक्सर
मेरा नाम फलक पर लिखा, मैंने ख्वाबो में देखा है
मेरी सांस दहक़ उठती है, और खून उबल जाता है
मेरी मुठ्ठी में किस्मत से मेरा जज्बा लड़ जाता है
कुछ नयी लकीरे खीचूँ, एक नया भविष्य लिखूं
मेरा खून कलम में स्याही बन करके उतर जाता है
मेरा चाँद भी सूरज बनने को ऐसे तप जाता है
एक नया सवेरा लाने, वो आग में जल जाता है
तुम ये न समझ पाओगे, ये कैसा जुनूँ होता है
इस आग में जलने का भी अपना ही मज़ा होता है।
~KavitaNidhi
एक ख्वाब खुली आँखों aksar ki basa hota hai है।
तितली सी फड़कती हैं मेरी धड़कनो में अक्सर
मेरा नाम फलक पे dekho khwabo me likha hota hai. hai है।
मेरी सांसे मचल उठती है, तुम ये न समझ पाओगे
इस आग में जलने का भी अपना ही मज़ा होता है।
~KavitaNidhi
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