Gazal-वक़्त बदलता है

 2122 1212 22

एक जैसा कहां ये चलता है 

हर घड़ी वक़्त ये बदलता है 


आज तेरा है कल मेरा होगा 

सिलसिला जीत का यू चलता है 


आंसुओं  के शरारे गिरते हैं  

हो धुआं दिल मेरा जो जलता है 


राहें-मंज़िल दिखे है धुंधली सी 

अश्क़ बन ख्वाब जो पिंघलता है 


सच को सच जब भी बोलती हूँ निधि 

मेरा लहज़ा सभी को खलता  है 


~kavitaNidhi



धुँधला सा सब यहाँ नज़ारा है  

दिख रहा हर नज़ारा धुंधला सा 


ज़िन्दगी ऐसी एक खुमारी  है 



इश्क़ का यूँ खुमार चढ़ता है 

मुश्किलो से नशा उतरता है 

-/————-

इश्क़ का जो नशा ये चढ़ता है 

मुश्किलो से ये दिल संभलता है 


धुंध छट जाए तो दिखाई दे 

वर्ना हर शक्स तुझ सा लगता है 


प्यार की इस तरह खुमारी है

बे सबब दिल मेरा धड़कता है 


क्यों मैं चाहत में हूँ तेरी पागल 

प्यार पे जोर कहाँ चलता है 


जिस तरह मुझसे वो मिला है निधि 

दिल का दिल से कोई तो रिश्ता है

~kavitaNidhi

———


टूट के दिल मेरा जो बिखरा है 

आसमा आतिशी सा दिखता है 


सोचने जो लगा वो अपने लिए

आँख में सबकी वो खटकता है 



सोच ले जो जरा वो खुद के लिए 


जो छटे धुंध कुछ दिखायी दे

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