Coffee Aur Tum
पहले २ घूँट अजीब लगे थे
थोड़े से कड़वे
फिर अगले २ पहले से बेहतर
बिलकुल तुमसे
और फिर दिन पर दिन हर एक कप के साथ
मुझे ये कॉफ़ी अच्छी लगने लगी
और अब कॉफ़ी आदत में शुमार है
तुम्हारी तरह
तुम्हारे साथ एक कप कॉफी और थोड़ी खामोश सी बातें
जन्नत है
तन्हाई में भी तुम्हारी याद और बस एक कप कॉफ़ी
काफी है
हर दिन banconey में बैठ ये जो साथ में कॉफ़ी पीते हैं हम
यही ज़िन्दगी है
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