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Showing posts from June, 2024

जा रही हूं।

जा रही हूं मेरी याद आये तो ढूंढ लेना  मुझे,  वहीँ… लव स्टोरी की किताब के पन्नो के  बीच  रक्खे उस पुराने गुलाब की खुशबू में तुम्हारी अलमीरा की ड्रॉर में  पड़े उस टूटे हुए झुमके में  माथे से उतार, आईने पर लगायी  उस लाल काली बिंदी में  चांद पे ठहरे  हुए काले बदल में  बारिश की टपकती हुई बूंदो में बाइक पर तुम्हारे कंधो पे कभी  रक्खे हुए हाथो के एहसास में बालो को सहलाते हुए हवा के झोको में पीले फूलो पे मँडराती तितली में और ढूंढ  लेना मुझे  गोवा के बीच पर पानी की कल कल आवाज में टूटे पत्ते की चाल में दूर कहीं से आते बच्चों की हँसने की आवाज़ में स्टेशन पे गाड़ी के लिए रुकी उन आंखों के इंतजार में बारिश की शाम के बाद गीली सड़को पे पड़ती  लाइट की झिलमिलहाट  में और जब जाओगे अकेले दूर शहर से  ढूंढ लेना मुझे सड़क की सुनसान में  थक के लेटोगे कभी तोखुद की  धड़कनो की आवाज में और कभी मूवी हॉल में यूँ  ही  मिल जाऊंगी तुम्हें किसी किरदार में  पर अब जाना है, तो जा रही हूँ  याद आ...

रात कचहरी

रात कचहरी बैठी थी तारे सब सुनने आये  चंदा पे इल्जाम है ये कि याद तेरी ये ले आये  दिल में दर्द उठता है ये बड़ा मुझे तड़पता है  नींद मेरी ये चोरी करके  बादल में छुप जाता है हँसता है माशूक सा ये  और कभी  मुस्कुराता है  थोड़ा सा ये छेड़ छाड़ कर पूनम सा खिल जाता है  रात ने सब सुनवायी की तब बादल की भी गवाही  ली तब नींद को भी कटघरे खड़ा कर पेशी उसकी लगयी थी तब चांद का रंग था उड़ हुआ  पर बात पे अपनी अड़ा हुआ बोला मेरी सूरत ऐसी  क्या ये भी मेरा गुनाह हुआ चांद ने फिर की अपील कई  हैं पास    मेरे  न वकील कोई इल्जाम से बचने की भी क्या  इस दिल के पास, है डील कोई  सबकी सुन, जज, रात ने अब दे दिया फ़ैसला ऐसा कुछ गर रात में चन्दा आएगा   निकलेगा ये घूंघट में छुप  तब से चंदा आता तो है  नींदे भी मेरी ये  उड़ाता  हैं  पर केवल पूनम के ही दिन  सूरत ये पूरी दिखाता है   आज तलक भी सजा काटता  घूंघट में से जरा झांकता   और अमावस में  तो चंदा  छुप कर ही  है रात काटता...

Coffee Aur Tum

 पहले २ घूँट अजीब लगे थे  थोड़े से कड़वे  फिर अगले २ पहले से बेहतर  बिलकुल तुमसे  और फिर दिन पर दिन हर एक कप के साथ  मुझे ये कॉफ़ी अच्छी लगने लगी  और अब कॉफ़ी आदत में शुमार है  तुम्हारी तरह  तुम्हारे साथ एक कप कॉफी  और थोड़ी खामोश सी बातें  जन्नत है   तन्हाई में भी तुम्हारी याद और बस एक कप कॉफ़ी   काफी है  हर दिन banconey में बैठ ये जो साथ में  कॉफ़ी पीते हैं हम   यही ज़िन्दगी है