प्यार को गलियों में भी घूमे , दर - ए - मोहब्बत पे कई दस्तके भी दी जब ठुकराएं गए हर जगहा से निधि , पनहा मुझे मेरे दोस्तो ने ही दी ~kavitaNidhi वो क्या हक जताएंगे मुझेपे , जो मेरी बेरुखी भी सह न सके क्या करेंगे मोहब्बत हमसे , वो दो लफ्ज प्यार के कह न सके ~kavita Nidhi जरुरातों के बाजार में जब अपनी बोली लगी, बड़ी ऊँची कीमत मिली ये नहीं जानते निधि कि प्यार के बाजार से हम नीलम होके निकलें हैं ~kavita Nidhi कहाँ से लाते हैं वो अपनी बातों में बड़प्पन इतना मैंने जब भी हाल- ऐ- दिल ये कहा , खुद को छोटा सा महसूस किया...