ना शिक़वा न शिकायत
ना शिक़वा न शिकायत वो बस मुस्कुरा रहें हैं
दिल जानता है कि वो हमसे दूर जा रहें हैं
दिल रखलो तुम हमारा, झूठ ही का रूठ जाओ
देखो न तुमको आज हम, फिर से मना रहें हैं
शिक़वो का भी एक दौर, बीता है दरमियान जो
लगता था तब कि हमको, क्यों वो सता रहें हैं
क्या है घुटन में जीना, ये हमको समझ में आया
अब लड़ रहे हैं उनसे हम, वो बस मुस्कुरा रहे हैं
दिल ये समझ गया है अब ,कि वो दूर हो गए हैं
कुछ बिन कहे वो हमसे धीरे से जा रहे हैं
क्यों की नहीं थी कोशिश, सुनने की तुमको तब
बीते हुए उस कल पर,हम आज पछता रहे हैं
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